जय मिथिला

मिथिलाक लिपि, इतिहास, कला एवं संस्कृति पर शोधपूर्ण विमर्श

रामनवमीपूजा विधि

मिथिलाक परम्परामे उक्त आगम-पद्धतिसँ

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(एहि पद्धतिक दू टा पाण्डुलिपि हमरा लग उपलब्ध अछि। एकटामे कथाक संग संक्षिप्त पद्धति देल छैक आ दोसरमे कथाक संग विस्तृत पद्धति अछि। ई दूनू टा पद्धति महावीर मन्दिरसँ प. भवनाथ झाक संपादनमे प्रकाशित अगस्त्य-संहिताक परिशिष्टमे प्रकाशित अछि। पाण्डुलिपिक विवरण आदि ओहि पुस्तकमे विस्तारसँ देल गेल छैक। एही प्रकाशनक आधार पर मैथिल साम्प्रदायिक रामनवमीक पूजा पद्धति एतए देल जा रहल अछि। ई मूल पद्धति संस्कृतमे छैक, मुदा मन्त्रक अतिरिक्त जे कोनो निर्देश वाक्य संस्कृतमे छल तकरा मैथिलीमे अनुवाद कए एतए देल जा रहल अछि जाहिसँ पूजा केनिहार वा करौनिहारकें सुविधा हो।

पूज्य देवताक सूची-
(1) राम (2) सीता (3) लक्ष्मण (4) दशरथ (5) कौशल्या (6) कैकेयी (7) (8) भरत (9) शत्रुघ्न (10) सुग्रीव (11) हनुमान् (12) जाम्बवान् (13) विभीषण (14) अंगद (15) नल (16) नील (17) धृष्ट (18) जय (19) विजय (20) सुराष्ट्र सुमित्रा (21) राष्ट्र (22) कोपन (23) अकोपन (24) सुमन्त्र (25) इन्द्रादिदशदिक्पाल (26) अनन्त (27) ब्रह्मा।

तकर बाद निम्नलिखित देवताक पूजा फूल, चानन आ अक्षत लए करी।
ॐ वज्राय नमः, ॐ शक्त्यै नमः, ॐ दण्डाय नमः, ॐ शङ्खाय नमः, ॐ पाशाय नमः, ॐ गदाय नमः, ॐ शूलाय नमः, ॐ चक्राय नमः, ॐ पद्माय नमः, ॐ पद्मेशाय नमः।
तकर बाद सूर्य आदि नवग्रहक पूजा करी।

अथ रामनवमीपूजाविधिः
मृण्मयी प्रतिमां विधाय ॐ रामोऽसीति नाम कृत्वा ॐ मनोजूति रित्यादिमन्त्रेण प्रतिष्ठा कृत्वा रामं ध्यायेत्
कोमलाङ्ग विशालाक्षमिन्द्रनीलसमप्रभम्।
दक्षिणांशे दशरथं पुत्रीवेक्षणतत्परम्।।
पृष्ठतो लक्ष्मणन्देवं सच्छत्रं कनकप्रभम्।
पार्श्वे भरतशत्रुघ्नौ तालवृन्तकरावुभौ।।
अग्रेप्यग्रं हनूमन्तं रामानुग्रहकांक्षितम्।
एहि प्रकारें ध्यान कए अपन शाखाक अनुसार प्रतिमाक स्थापना करी।
[अपन शाखा सँ तात्पर्य अछि जे पूजा केनिहार छन्दोग छथि अथवा वाजसनेयी, बूझि निम्न प्रकारें प्रतिष्ठा करी-
प्राणप्रतिष्ठामन्त्रः।
वाजसनेयीक लेल- ॐ मनोजूतिर्जुषतामाज्यस्य बृहस्पतिर्यज्ञमिमन्तनोत्वरिष्टं यज्ञसमिमं दधातु। विश्वेदेवास इह मादयन्तामों प्रतिष्ठ।। ॐ श्रीरामचन्द्र साङ्ग-सायुध-सवाहन-सपरिवार इह सुप्रतिष्ठितो भव। इति । ।
छन्दोगक लेल-  ॐ वाङ्मनः प्राणापानो व्यान चक्षुः श्रोत्रं शर्मवर्मभूतिः प्रतिष्ठा ॐ श्रीरामचन्द्र साङ्ग-सायुध-सवाहन-सपरिवार इह सुप्रतिष्ठितो भव।।]
स्नानक मन्त्र-
ॐ इन्द्राग्निर्यमश्चैव निर्ऋतोवरुणोऽनिलः। |
कुबेर ईशो ब्रह्मा च दिक्पालाः स्नापयन्तु ते॥
तखनि यव लए-
ॐ हौं श्रीमहावीर समरवीरपते श्रीरामचन्द्र इहागच्छ इह तिष्ठ एहि मन्त्रसँ आवाहन कए,
स्थापित कए
फल, फूल, जल, आमक पल्लव, अशोकक पात, तुलसीपात सँ युक्त श्वेत शंख हाथमे लए अर्घ्य दी-
दशग्रीवविनाशाय जातोऽसि रघुनन्दन।
गृहाणार्घ्यं मया दत्तं प्रसीद परमेश्वर।।
एषोऽर्घ्यः भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
सुगन्धिचन्दनं दिव्यं कर्पूरादिमिश्रितम्।
सीतया भार्थ्यया सार्द्ध रक्षोघ्नं परिगृह्यताम्।।
चानन-
इदमनुलेपनं भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
फूल-
पुष्पन्तु परं दिव्यं पुण्यं सुरभिसंयुतम्।
गृहाण परया भक्त्या मया दत्तं जगत्पते।।
इदं पुष्पं भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
जनेउ-
श्रीरामविबुधाधीश सुरासुरवरप्रद।
यज्ञोपवीतं मद्दतं परिधत्स्व रघुनन्दन।। इमे यज्ञोपवीते बृहस्पतिदैवते भगवते श्री रामचन्द्राय नमः।
जोड़ा वस्त्र-
ॐवासो युगं गृहाणेश तन्तुसन्तानकल्पितम्।
सीतया भार्थ्यया सार्द्ध रक्षोघ्नं परिधीयताम्।। इमे वासोयुगे बृहस्पतिदैवते भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
धूप-
ॐरामचन्द्र सुरश्रेष्ठ जानक्या भ्रातृभिः सह।
पूजितोऽसि मया देव धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम्। एष धूपः भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
दीप-
ॐ मारीचघ्न महाबाहो सङ्ग्रामव्यसन प्रभो।
दीपोऽयं गृह्यतां देव त्रैलोक्यध्वान्तनाशनः।। एष दीपः भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
ताम्बूल-
इदं ताम्बूलं भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
नैवेद्य-
नैवेधं फल पक्वान्नं शर्कराघृतपाचितम्।
गृहाण जगतां सर्वैर्बन्धुजनैस्सह।। एतानि नैवेधानि ॐ भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
दण्डवत् प्रणाम-
ॐ नमस्ते पुण्डरीकाक्ष त्राहि मां भवसागरात्।
सर्वपापप्रणाशार्थं दण्डवत् प्रणमाम्यहम्।।
प्रदक्षिणा-
ॐ यानि कानि कृतानीह पापानि मम जन्मनि।
तानि तानि प्रणश्यन्ति प्रदक्षिण पदे पदे।।
प्रदक्षिणाक बाद बैसि कए पुष्पाञ्जलि-
ॐ नमस्ते देव देवेश सुरासुरपते जय।
जय कामद भक्तानां जय दाशरथे प्रभो॥
जय सीतापते नाथ जय भग्नेशकार्मुक।
जय ब्रह्माण्ड खण्डेश जय रावणमर्दन।।
जय बालीकपीशघ्न जय सुग्रीवराज्यद।
जय द्विजगणानन्द जय वायुसुतप्रिय।।
इति संकीर्घ्य देवेशं प्रणिपत्य पुनः पुनः।
सर्वान् कामानवाप्नोति ततो मोक्षमवाप्नुयात्।। एष पुष्पाञ्जलिः नमो भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
तखनि सीताक पूजा-
आवाहन-
ॐ सीते इहागच्छ इह तिष्ठ इत्यावाह्य
अर्घ्य-
ॐ दशाननविनाशाय जाता धरणिसंभवा।
मैथिली शीलसम्पन्ना पातु नः पतिदेवता।। एषोऽर्घ्यः ॐ सीतायै नमः।
चानन- इदमनुलेपनम्।
सिन्दूर- इदं सिन्दूरम्।
अक्षत- इदमक्षतम्।
फूल- इदं पुष्पम्।
जल लए धूप, दीप, नैवेद्य आदिक उत्सर्ग-
एतानि गन्ध-पुष्प-धूप-दीप-ताम्बूल-नैवेद्यानि ॐ सीतायै नमः।
लक्ष्मण पूजा-
आवाहन-
लक्ष्मण इहागच्छ इह तिष्ठ इत्यावाह्य
अर्घ्य-
ॐ निहतो रावणिर्येन शक्रजिच्छत्रुघातिना।
सः पातु लक्ष्मणो धन्वी सुमित्रानन्दवर्द्धन।। एषोऽर्घ्यः भगवते श्री लक्ष्मणाय नमः।
तखनि अष्टदल पर पूजा करी-
अष्टदलक पूर्व दल पर दशरथक आवाहन एवं पूजन-
आवाहन-
ॐ दशरथ इहागच्छ इह तिष्ठेत्यावाह्य
अर्घ्य-
ॐ नानाविधगुणागार गृहाणार्थ्यं नृपोत्तम।
रविवंशप्रदीपाय नमो दशरथाय वै॥ एषोऽर्घ्यः दशरथाय नमः।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

अग्निकोणक दल पर कौशल्याक पूजा-
आवाहन-
ॐ कौशल्ये इहागच्छ इह तिष्ठ।
अर्घ्य-
ॐ गृहाणार्थ्यं मया देवि रम्ये दशरथप्रिये।
जगदानन्दवन्द्यायै कौशल्यायै नमो नमः।। एषोऽर्घ्यः कौशल्यायै नमः।
चानन- इदमनुलेपनम्।
सिन्दूर- इदं सिन्दूरम्।
अक्षत- इदमक्षतम्।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

दक्षिण दल पर कैकेयी पूजा-
आवाहन-
कैकेयि इहागच्छ इह तिष्ठ।
अर्घ्य-
ॐ दृढ़प्रतिज्ञे कैकेयि मातर्भरतवन्दिते।
गृहाणार्घ्यं महादेवि रक्ष मां भक्तवत्सले।। एषोऽर्घ्यः कैकेय्यै नमः।
चानन- इदमनुलेपनम्।
सिन्दूर- इदं सिन्दूरम्।
अक्षत- इदमक्षतम्।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

नैर्ऋत्यदलपर सुमित्राक पूजा-
आवाहन-
सुमित्रे इहागच्छ इह तिष्ठ।
अर्घ्य-
ॐ शुभलक्षणसम्पन्ने लक्ष्मणानन्दकारिणि।
सुमित्रं देहि मे देवि सुमित्र्यै वै नमो नमः।। एषोऽर्घ्यः सुमित्रायै नमः।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

पश्चिम दलपर भरत-पूजा-
आवाहन-
भरत इहागच्छ इह तिष्ठ।
अर्घ्य-
ॐ भक्तवत्सल भक्त्यात्म रामभक्तिपरायण।
भक्त्या दत्तं गृहाणार्थ्यं भरताय नमो नमः। ॐ एषोऽर्घ्यः ॐ भरताय नमः।
चानन- इदमनुलेपनेम्।
तिल- एते तिलाः।
फूल- इदं पुष्पम्।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

तखनि वायुकोणक दल पर शत्रुघ्न पूजा-
आवाहन-
शत्रुघ्न इहागच्छ इह तिष्ठ।।
अर्घ्य-
ॐ लवणान्तक शत्रुघ्न शत्रुकाननपावक।
गृहाणार्थ्यं मया दत्तं प्रसीद कुरु मे शुभम्।। एषोऽर्घ्यः ॐ शत्रुघ्नाय नमः।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

उत्तर दलपर सुग्रीवक पूजा-
आवाहन-
सुग्रीव इहागच्छ इह तिष्ठ।
अर्घ्य-
ॐ सुग्रीवाय नमस्तुभ्यं दशग्रीवान्तकप्रिय। |
गृहाणार्थ्यं महावीर किष्किन्धानायक प्रभो।। एषोर्घ्यः ॐ सुग्रीवाय नमः।
उपर्युक्त विधिसँ पूजा करी।

ईशानकोणक दल पर  हनुमानक पूजा-
आवाहन-
ॐ हनुमन्नहागच्छ इह तिष्ठ।
अर्घ्य-
ॐ कूर्मकुम्भीव संकीर्णमुत्तीर्णोऽसि महार्णवम्।
हनूमते नमस्तुभ्यं गृहाणा महामते॥ एषोर्घ्यः ॐ हनुमते नमः।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

तखनि निम्नलिखित देवताक पूजा ईशानकोणक दल पर करी-
ॐ विभीषण इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ विभीषणाय नमः। इति पूजयेत्।
ॐ जाम्बवान् इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ जाम्बवते नमः इति पूजयेत्।
ॐ अंगद इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ अङ्गदाय नमः। एवं पूजयेत्।
ॐ नल इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ नलाय नमः। एवं पूजयेत्।
ॐ नील इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ नीलाय नमः। एवं पूजयेत्।

तखनि अष्टदलक बीच कर्णिकाक चारूकात पूर्वसँ आरम्भ कए क्रमशः आठो दल पर –
ॐ धृष्टे इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः धृष्ट्यै नमः।
ॐ जय इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः जयाय नमः।
ॐ विजय इहागच्छ इह तिष्ठ।
ॐ सुराष्ट्र इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ सुराष्ट्राय नमः।
ॐ राष्ट्रवर्द्धन इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः राष्ट्रवर्द्धनाय नमः।
ॐ अकोपन इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ अकोपनाय नमः।
ॐ धर्मपाल इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ धर्मपालाय नमः।
ॐ सुमन्तो इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोर्म्यः ॐ सुमन्ताय नमः।

अष्टदलक आठो अग्रभाग पर पूर्वसँ आरम्भ कए क्रमशः आठो लोकपालक पूजा करी-
ॐ लोकपाल इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोर्घ्यः लोकपालाय नमः।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

तखनि अष्टदल कमलक बाहर आठो दिशामे आठो दिक्पालक पूजा करी-
ॐ इन्द्र इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ इन्द्राय नमः। एवं पूजयेत्।
ॐ अग्ने इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ अग्नये नमः।
ॐ यम इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ यमाय नमः।
ॐ निर्ऋते इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ निर्ऋतये नमः।
ॐ वरुण इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ वरुणाय नमः।
ॐ वायो इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ वायवे नमः।
ॐ कुबेर इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ कुबेराय नमः।
ॐ ईशान इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ ईशानाय नमः।
निर्ऋति आ वरुणक बीचमे अनन्तक पूजा करीः-
ॐ अनन्त इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ अनन्ताय नमः।
इन्द्र आ ईशानक बीचमे ब्रह्माक पूजा करी-
ब्रह्मन् इहागच्छ इह तिष्ठ। एषोऽर्घ्यः ॐ ब्रह्मणे नमः।

तखनि श्रीरामक अस्त्र-शस्त्रक पूजा करी-
ॐ वज्राय नमः।
ॐ शक्त्यै नमः।
ॐ दण्डाय नमः
ॐ खड्गाय नमः।
ॐ पाशाय नमः।
ॐ अङ्कशाय नमः।
ॐ गदायै नमः।
ॐ शूलाय नमः।
ॐ चक्राय नमः।
ॐ पद्माय नमः।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

सूर्य आदि नवग्रहक पूजा-
ॐ सूर्यादिनवग्रहाः इहा गच्छत इह तिष्ठत। एषोऽर्घ्यः ॐ सूर्यादिनवग्रहेभ्यो नमः।
फूल, चानन आदिसँ पञ्चोपचारसँ पूजा करी।

तखनि अगस्त्य-संहितासँ उद्धृत कथा सुनी
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कथा सुनलाक बाद आरती कए भरि दिन भजन-कीर्तनमे बिताबी।

रातिक कृत्य
घीक दीप जराए एहि मन्त्रसँ संकल्प कए श्रीरामक नामसँ अर्पित करी-
नमोऽस्यां रात्रौ चैत्रशुक्लरामनवम्यां सकलपापविनिमुक्तिपूर्व्वक-ज्योतिष्मद्-विमानकरणक-विष्णुलोकगमनकामनया घृतदीपं श्रीरामचन्द्रायाहन्ददे।।
तकर बाद पुष्पाञ्जलि लए बैसि कए एहि मन्त्रसँ पुष्पाञ्जलि अर्पित करी-
नमो नमस्ते देवेश सुरासुरपते जय।
जय कामद भक्तानां जय दाशरथे प्रभो।।
जय सीतापते नाथ जय भग्नेशकार्मुक।
जब ब्रह्माण्डखण्डेश जय रावणमर्दन।
जय बालिकपीशघ्न जय सुग्रीवराज्यद।
जय द्विजगणानन्द जय वायुसुतप्रिय।।
इति संकीर्त्य देवेशं प्रणिपत्य पुनः पुनः।
सर्वान् कामानवाप्नोति ततो मोक्षमवाप्नुयात्।।
एष पुष्पाञ्जलिः नमो भगवते श्रीरामचन्द्राय नमः।
॥ श्रीरामचन्द्राय नमः।

अगिला दिन भिनसरमे पुनः सभ आवाहित देवताक फूल, चानन अक्षतसँ पूजा कए,
क्षमाप्रार्थना-
देवदेव  महाबाहो दशग्रीवनिकृन्तन।
गृहीत्वा मत्कृतां पूजां स्वस्थानं गच्छ ते नमः।।
मम कृतां देव पूजां सौभाग्यसुखदान्तथा।
गृहीत्वा गच्छ स्वस्थानमपराधं क्षमस्व मे।।
न्यूनाधिक च यत्किञ्चिन्नवम्यां च यत्कृतम्।।
कृपां मयि विधायेत्थं क्षमस्व पुरुषोत्तम।।
रामचन्द्र सुराधीश वैकुण्ठं व्रज पार्थिव।
पूजां मदीयामादाय मम स्वस्तिकरो भव॥
ॐ रूपन्देहि यशो देहि भाग्यं भगवन् देहि मे।
धर्मान्देहि धनन्देहि सर्वान् कामान् प्रदेहि मे।।
प्रणाम कए,
यान्तु देवगणाः सर्वे पूजामादायमामकीम्।
इष्टकामप्रसिद्धर्थं पुनरागमनाय च।। श्रीरामचन्द्र पूजितोऽसि प्रसीद इति विसर्जयेत्।

तखनि जल लए,
ॐलक्ष्मणादयो देवाः पूजिताः स्थः क्षमध्वमिति तान् विसर्जयेत्।
दक्षिणा- (कुश, तिल आ जल लए)
ॐ अद्य कृतैतद्रामनवम्यां ससीतश्रीरामलक्ष्मणादिपूजनप्रतिष्ठार्थमिदं हिरण्यमग्निदैवतं यथानामगोत्राय ब्राह्मणाय दक्षिणामहं ददे।
माँटिक प्रतिमाकें महानदीमे विसर्जित करी।
विसर्जनक बाद स्नान कए नित्यकर्म कए, ब्राह्मण-भोजन कराए हुनका दक्षिणा दए स्वयं भोजन करी।
इति रामनवमी पूजाविधि।।