जय मिथिला

मिथिलाक लिपि, इतिहास, कला एवं संस्कृति पर शोधपूर्ण विमर्श

ज्योतिष शास्त्रक अनुसार मिथिला नगरीक स्थान निर्धारण

 

ज्योतिष शास्त्रमे स्थानीय राश्युदयक मान निकालबाक लेल पलभाक निर्धारण हित अछि। मिथिलाक पलभा छ आंगुर निर्धारित अछि आ एही आधार पर सभटा गणना कएल जाइत अछि। ई 6 आंगुर पलभा गणनाक आधार पर 26.56505°N अक्षांशक थीक। 26.5952° N अक्षांश पर सीतामढीक जानकी मन्दिर अवस्थित अछि। तें एहि आधार पर सेहो सीतामढीक क्षेत्र प्राचीन मिथिला नगरी साबित होइत अछि।

मिहिला परगनाक क्षेत्रक पहचान जे मध्यकालमे कएल गेल सेहो एही बात कें सिद्ध करैत अछि जे प्राचीन मिथिला नगरी सीतामढीक चारूकातक क्षेत्र थीक।

एहि बात कें बुझबाक लेल विस्तारसँ एतए पढल जा सकैत अछि-

ज्योतिष शास्त्र मूलतः गणना थीक, जाहिमे प्राचीन कालमे ग्रह-नक्षत्रक गतिकें देखि सभटा गणना कएल जाइत छल। स्थानीय ज्योतिषी प्रत्यक्ष देखि कए आ शास्त्रक अनुसरण कए पंचांग बनबैत छलाह आ तकर उपयोग व्रत-पर्वक निर्णय, बच्चाक जन्मकुण्डली-निर्माण आदिक लेल ओहि क्षेत्रमे होइत छल।

स्थानीय समयक निर्धारण लेल ज्योतिष शास्त्रमे पलभाक गणना बड महत्त्वपूर्ण रहए। एही आधार पर स्थान निर्धारण होइत छल। वर्तमानमे अक्षांश आ देशान्तर कोनो स्थानक निर्धारण लेल उपयोगी अछि ओहिना पलभाक गणना उपयोगी छल। वस्तुतः प्राचीन कालमे पलभाक निर्धारण अक्षांशक निर्धारण छल।

मेष संक्रान्ति दिन मध्याह्न कालमे 12 अंगुलक ऊर्ध्वाधर शंकुक छाया जतेक अंगुल आ प्रत्यंगुल होइत छल ओ ओहि क्षेत्रक पलभा कहबैत छल। ई एकटा स्थिरांक थीक जे पृथ्वीक ओहि निश्चित भू-भागक लेल सभखन निश्चित रहैत अछि।

मिथिलाक लेल 6 अंगुल पलभा स्थिरांक अछि, जकर आधार पर मिथिलामे सभटा गणना भेल अछि। प्रतिदिन राशिक भोगकाल, संगहिँ ओकर उदय आ अस्तक समय निर्धारणमे पलभाक उपयोग सभसँ सरल अछि जकरा सामान्यो व्यक्ति बूझि सकैत छथि।

ज्योतिष शास्त्रमे लंकाकें विषुववृत्त पर अवस्थित मानल गेल अछि, माने ओ शून्य डिग्री अक्षांश पर अवस्थित अछि। ओहि ठाम सभ राशिक उदयमानक संग मिथिलाक पारम्परिक राश्युदयमान एतए देखल जा सकैत अछि-

 


राशि

राशि

लंकामे उदयमान

मिथिलामे उदयमान

अंतर

मेष

मीन

278 पल

218 पल

-60 पल

वृष

कुम्भ

299 पल

251 पल

-48 पल

मिथुन

मकर

323 पल

303 पल

-20 पल

कर्क

धनु

323 पल

343 पल

+20 पल

सिंह

वृश्चिक

299 पल

347 पल

+48 पल

कन्या

तुला

278 पल

338 पल

+60 पल

एक पल 24 सेकेंडक होइत अछि।

एही मिथिलोदय मानक उल्लेख डाक सेहो अपन वचनमे केने छथि। डाकक ई वचन श्रुति पर्मपारसँ नहिं अपितु म.म. पशुपति (14म शतीक अंत)क लिखल व्यवहाररत्नावली नामक ग्रन्थमे लिखित परम्परासँ उपलब्ध अछि।

मीन मेष तिन दण्डा दीस ता उपर दिअ पल अठतीस।
वृष कुम्भ चउदण्डा मान पला एगारह भुगुतिअ मान।।
मकर मिथुन पल तीनि  गूनु  कर्कट  तैतालीस  धनु।
सिंहे वृश्चिके साञँतालीस तुल सह कन्या पल अठतीस।
आठ लग्न मिथुना सँओ गनिअ।
पाँच दण्ड  तुल  पात  करिअ।।

वस्तुतः डाकक एहि वचनमे ओएह गणना अछि जे संस्कृतमे एहि प्रकारें मिथिलाक परम्परामे कहल गेल अछि-

अष्टेन्दुपक्षाः शशिबाणपक्षाः गुणाभ्ररामा गुणवेदरामाः।
शैलाब्धिरामा वसुरामरामा क्रमोत्क्रमान्मेषतुलादिमानम्।।

एकर अर्थ देखी-
अष्टेन्दुपक्षा- आठ, इन्दु आ पक्ष माने 8, 1 आ 2- अंकस्य वामा गतिः एहि नियमक अनुसार भेल- 218 पल।
शशिबाणपक्षाः- चन्द्रमा, बाण आ पक्ष माने- 1, 5 आ 2, उपर्युक्त रीतिएँ भेल 251 पल।
गुणाभ्ररामा- गुण, आकाश, आ राम माने- 3, 0 आ 3, उपर्युक्त रीतिए भेल- 303 पल।
गुणवेदरामा- गुण, वेद आ राम माने 3, 4 आ 3, उपर्युक्त रीतिएँ भेल- 343 पल।
शैलाब्धिरामा- पर्वत, समुद्र आ राम माने 7, 4 आ 3, उपर्युक्त रीतिएँ भेल- 347 पल।
वसुरामरामा- वसु, राम आ राम माने 8, 3 आ 3, उपर्युक्त रीतिएँ भेल- 338 पल।
यैह क्रम आ उत्क्रमसँ मेषादि आ तुलादिक मान होइत अछि।

एहि प्रकारें देखैत छी जे डाक सेहो मिथिलाक पलभाक अनुरूप स्थानीय राशिक उदयमान देने छथि आ यैह मिथिलाक अपन स्थानीय उदयमान थीक। एहि प्रकारें मिथिलामे सभटा गणना 6 आंगुर पलभा पर भेल अछि।

एहि 6 अंगुल पलभाक अर्थ भेल tangent (26.56505°)=0.5 (6/12) माने 26 डिग्री 39 मिनट 32 सेकेंड अक्षांश पर छह आंगुर पलभा हेतैक। हमरालोकनि जनैत छी जे सीतामढी क्षेत्रक अक्षांश 26.5952° Nअछि मुदा वर्तमान जनकपुरक अक्षांश 26.7271° N अछि। एतेक अंतर गणनाक दृष्टिसँ कम ने होइत अछि।

तें ई कहल जा सकैत अछि जे मिथिला नगरी सीतामढीक क्षेत्र छल आ ओही स्थानक आधार पर मिथिलाक पलभा 6 आंगुर निर्धारित भेल जे सम्पूर्ण मिथिलाक लेल एकटा मानक मानल गेल। एही मानक स्थिरांकक प्रयोग ज्योतिष गणनाक लेल हिमालयसँ गंगाकात धरि आ गण्डक सँ महानन्दा धरि कएल गेल।